
स्वास्थ्य (Health)
स्वस्थ कौन है? यह जानने से पहले यह प्रश्न उठता है कि "स्वस्थ" कहते किसको है?
"स्वस्थ = स्व+स्थ" अर्थात अपने स्वरूप में स्थित हो जाना।
इसका उत्तर महर्षि कपिल मुनि सांख्य दर्शन के द्वितीय अध्याय के 34 वे सूत्र में इस प्रकार दे रहे हैं।
🌷तन्निवृत्तौ उपशान्तोपराग: स्वस्थ:। (सांख्य २/३४)
अर्थात जब इन्द्रियों की वृत्तियाँ भौतिक विषयों से हट जाती है, तब उस राग-द्वेष रहित अवस्था को स्वस्थ कहतें है। उसके बाद चेतन में अचेतन और अचेतन में चेतन की भावना जो अविद्या के कारण रहती है वह न रहकर चेतन में चेतन की भावना विवेक पूर्वक रहना ही आत्मा का स्वरूप में अवस्थित होना कहलाता है। अर्थात स्वयं में जो स्थित है, वही 'स्वस्थ' है। ऐसा महर्षि कपिल कह रहे हैं। यह एक बहुत ऊंची स्थिति है और बहुत महान परिभाषा है जो कि समाधि के पश्चात आत्मसाक्षात्कार होने पर प्राप्त होती है जब समस्त विषय संबंधी इंद्रियवृत्तियां हट जाती है।
इस आधार पर यदि किसी को स्वस्थ माने तो वह तो कोई योगी, ऋषि हो सकता है। अन्य कोई भी इस संसार में स्वस्थ नहीं है।
आयुर्वेद के सबसे बड़े ग्रंथ चरक संहिंता के अनुसार स्वस्थ कौन?
आयुर्वेद के ऋषि प्रतीकात्मक रूप से पक्षियों के द्वारा बोले जा रहे इस प्रश्न का उत्तर देते हैं
🌷हितभुक् मितभुक् ऋतभुक्
जो हितकारी भोजन करता है अर्थात् उचित मात्रा में, सात्त्विक, पौष्टिक, अपनी व भोजन की प्रकृति को ध्यान में रखकर, परिश्रम करके, सत्य की कमाई से ग्रहण करता है वह रोगी नहीं होता।
आयुर्वेद के महर्षि चरक ने इसे इस प्रकार से कहा-
🌷हिताहारा मिताहारा अल्पाहारा च ये जना:। न च वैद्या:चिकित्सन्ति: आत्मनस्थे चिकित्सका:।
अर्थात जो लोग हितकारी, सत्य परिश्रम से युक्त, भूख से कम मात्रा में भोजन करते हैं, उन्हें किसी चिकित्सक की आवश्यकता नहीं। वह अपने आप में स्वयं ही चिकित्सक हैं।
